meta name="google-site-verification" content="B3o76BU3rhmCE8Ki5hiR_bfAs6-RIVBoXKMtux934S4" /> Hindi poem: March 2022

Sunday, March 6, 2022

खरोंचे।

 मुद्दातों बाद 

मिला है कुछ पल 

उसको 

देख पाने की 

वरना 

आंखों के किनारों पर 

बहते 

अंशुओं के 

खरोंचे कई हैं।



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