meta name="google-site-verification" content="B3o76BU3rhmCE8Ki5hiR_bfAs6-RIVBoXKMtux934S4" /> Hindi poem: October 2019

Monday, October 28, 2019

लिख के मिटा दिया ।

धड़कन में दुबकी एक बात थी
कुछ राज तो कुछ एहसास थे
कुछ मीठे और तीखे अल्फ़ाज़ थे
कुछ अपने थे कुछ सपने थे
उन अपनों के खातिर
इस दिल में इस दिल ने
न जाने कितने अरमान बिठा दिया
तेरे खुशी के खातिर
देख ना
मैंने अपने आंसुओ को
अपने आंखो में ही सजा दिया
आज तुझसे पूछे बगैर ही
मैंने इन बातो को पन्नों से
लिख के मिटा दिया ।।


Saturday, October 26, 2019

विदाई

आज तेरे हाथो की लकीरों में ,
एक और लकीर जुट गया ,
पर उस बबूल के दामन से ,
तेरा दामन छूट गया ,
आज तेरे उन नए कंगनों से ,
तेरा हाथो का वो पुराना कंगन फुट गया,
आज तेरे बाबूल के आंगन से तेरा जन्मों का नाता टूट गया ।।