meta name="google-site-verification" content="B3o76BU3rhmCE8Ki5hiR_bfAs6-RIVBoXKMtux934S4" /> Hindi poem: विदाई

Saturday, October 26, 2019

विदाई

आज तेरे हाथो की लकीरों में ,
एक और लकीर जुट गया ,
पर उस बबूल के दामन से ,
तेरा दामन छूट गया ,
आज तेरे उन नए कंगनों से ,
तेरा हाथो का वो पुराना कंगन फुट गया,
आज तेरे बाबूल के आंगन से तेरा जन्मों का नाता टूट गया ।।

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